Sunday, 19 October 2014

आओ मैं और तुम मिल जायें

आओ मैं और तुम मिल जायें,
एकांगी हो हम बन जायें।..................................आओ मै.............।
मैं मैं न रहूँ तुम तुम ना रहो,
मैं तुममें रहूँ तुम मुझमें रहो।
निज अस्तित्व मिटा कर आपस में-
एक जुस्त हो जायें..................................आओ मै.....................। 
मैं और तुम हो एक रूप,
मिलकर भोगेंगे सुख की छाया-
दुख की धूप।
साथ जियेंगे साथ मरेंगे का नारा बुलंद कर-
हम हमदम बन जायें..................................आओ मै....................।
हम प्रेम पथिक है संग संग चलते जायेंगे,
हाथ थाम कर दुर्गम पथ पर आगे ही बढ़ते जायेंगे।
अनजान बने हम हर मुश्किल से-
मिलकर कदम बढायें..................................आओ मै....................।
अपनी होगी एक ही ढपली एक राग,
चाहे फगवा हो या विहाग।
मैं और तुम हम ही रहकर-
गीत प्यार के गायें..................................आओ मै....................। 
जयन्ती प्रसाद शर्मा


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