Wednesday, 23 December 2015

जो हम तुमसे मिल पाते

जो हम तुमसे मिल पाते,
तेरी राम कहानी सुनते-
कुछ हम अपनी व्यथा सुनाते...........जो हम.............।
मत पूछो कैसे बीते दिन,
नहीँ चैन था मन में पल छिन
आशाओं के दीप जलाकर,
रैन बिताती मैं तारे गिन
मधुर मिलन के बीते पल,
यादों में आकर मुझे जलाते...........जो हम.............।
मैं तेरी तुम मेरे हो,
जीवनाधार तुम मेरे हो
चित्रित कर दी छवि अपनी मेरे मन-
तुम बहुत ही कुशल चितेरे हो
मेरे ह्रदय पटल पर चित्र तुम्हारा,
मिटता नहीं मिटाते...........जो हम.............।
अब विरह सहा नहीं जाता है,
मन धीरज नहीं पाता है
कैसे तुन बिन जियूं जिन्दगी-
मुझे समझ नहीं आता है
चैन मुझे मिल जाता प्रियतम-
पड़े फफोले विरहानल से-
जो तुम सहला जाते...........जो हम.............।

जयन्ती प्रसाद शर्मा           
            
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