Saturday, 13 May 2017

माँ ममता का भण्डार

माँ जीवन का आधार,
माँ ममता का भण्डार।
नहीं माँ जैसा कोई उदार, 
कैसा भी हो बच्चा करती प्यार। 
माँ सुख बच्चों को देती, 
बलायें उसकी ले लेती। 
नहीं माँ की ममता का मोल, 
नहीं उसके स्नेह का तोल।
माँ कष्ट में बच्चे को पाती, 
भूख प्यास उसकी उड़ जाती। 
नहीं माँ की करुणा का अन्त,
उॠण  नहीं होओगे मृत्यु पर्यन्त। 
नहीं करो अवहेलना जन्म प्रदाता की, 
रहो पूजते माँ को बोलते जय माता की।

जयन्ती प्रसाद शर्मा   

चित्र गूगल से साभार 

Friday, 5 May 2017

अफसाना मौत का

जिया जाता नहीं मरा जाता नहीं,
अफसाना मौत का कहा जाता नहीं। 
सोचा था मौत तो हमराह है, 
चाहेंगे जब आ जायेगी। 
नहीं बनेगी बेवफा,
नहीं महबूब सी तड़पायेगी।
दिल घबड़ा उठा सांसें लगी डूबने,
लगता है अब मौत आयेगी।
ले जायेगी हम को साथ अपने,
सभी दुश्वारियों से बचायेगी।
नाते रिश्ते वाले सब आ गये हैं, 
सामान भी तैयार है। 
रुदालियाँ भी आ गई हैं, 
रुदन को तैयार हैं। 
जो था मेरा वह हुआ तुम्हारा, 
तुमको सब अधिकार है। 
चाहे बिगाड़ो चाहे सँवारो,
तुमको सब अख्त्यार है। 

जयन्ती प्रसाद शर्मा