गंजे को नख मत दे भगवान,
खोंटते खोंटते सिर, अपना हो जायेगा लहू लुहान।
उद्दमहीन अनायास जब,
कुछ पा जाते हैं।
नहीं सोच पाते हें सदुपयोग,
सिर अपना खुजलाते हैं।
खुजलाते खुजलाते सिर अपना,
हो जाते हैं हैरान................... गंजे को............ ।
करके ही अपने सिर की नोंच खसोट,
कचोट अडौस-पड़ौस में करते हैं।
करने लगते हैं तंग समाज को,
नहीं तनिक भी डरते हैं।
दुःखदायी हो जाते हैं,
गिरे पड़े जब पा जाते हैं अधिमान............ गंजे को.....।
जो सत्ता में आ जाते हैं हनक से उसकी,
पगला जाते हैं।
लगते हैं लूटने सम्पत्ति देश की,
अपने घर लाते हैं।
भूलकर देश और समाज की सेवा,
हो जाते हैं बे-ईमान................... गंजे को............ ।
राजनीति में आकर भूखे,
अफरा जाते हैं।
पी जाते हैं तेल देश का,
चारा भैंसों का खा जाते हैं।
कल के महान छील रहे आलू जेल में,
समय बड़ा बलवान................... गंजे को............ ।
जयन्ती प्रसाद शर्मा
खोंटते खोंटते सिर, अपना हो जायेगा लहू लुहान।
उद्दमहीन अनायास जब,
कुछ पा जाते हैं।
नहीं सोच पाते हें सदुपयोग,
सिर अपना खुजलाते हैं।
खुजलाते खुजलाते सिर अपना,
हो जाते हैं हैरान................... गंजे को............ ।
करके ही अपने सिर की नोंच खसोट,
कचोट अडौस-पड़ौस में करते हैं।
करने लगते हैं तंग समाज को,
नहीं तनिक भी डरते हैं।
दुःखदायी हो जाते हैं,
गिरे पड़े जब पा जाते हैं अधिमान............ गंजे को.....।
जो सत्ता में आ जाते हैं हनक से उसकी,
पगला जाते हैं।
लगते हैं लूटने सम्पत्ति देश की,
अपने घर लाते हैं।
भूलकर देश और समाज की सेवा,
हो जाते हैं बे-ईमान................... गंजे को............ ।
राजनीति में आकर भूखे,
अफरा जाते हैं।
पी जाते हैं तेल देश का,
चारा भैंसों का खा जाते हैं।
कल के महान छील रहे आलू जेल में,
समय बड़ा बलवान................... गंजे को............ ।
जयन्ती प्रसाद शर्मा
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