Sunday, 7 April 2019

यह तेरी गली यह मेरी गली

यह तेरी गली यह मेरी गली,
सौ बार आएंगे जाएंगे।
लाख करेंगे कोशिशें,
पर कभी न कभी टकराएंगे।
टकराहट में होगी खनक ,
पायल की जैसे झनक।
हम नहीं करेंगे गौर,
सुनी अनसुनी कर जाएंगे।
कभी खा जायेंगे  तैश,
लाठी डंडों से होएंगे लैस। 
हम रोक लेंगे रक्त पात,
जब लोग हमें समझायेंगे।
नहीं होएंगे हम कम ज़र्फ़,
जमने नहीं देंगे रिश्तों पर बर्फ।
होली दिवाली ईद बकरीद,
मिल कर सभी मनाएंगे।
जयन्ती प्रसाद शर्मा

Monday, 1 April 2019

मौसम सुहाना हो गया है

मौसम सुहाना हो गया है,
समाँ आशिकाना हो गया है।
जिन रास्तों पर अक्सर आते जाते थे,
उन पर चले बिना एक जमाना हो गया है।
जो अशआर बिखरे पड़े थे,
उनके मिलने पर सुन्दर तराना हो गया है।
उजड़ा दयार आपकी इनायत से,
खुशियों का खजाना हो गया है।
किसी रूंठे को मनाने की कोशिशें,
खुद को झिकाना हो गया है।
जहाँ बैठ कर तलाशते थे दिल का सकून,
वह जगह अब मनचलों का ठिकाना हो गया है।
कदम उठाते ही लोग छेकते हैं रास्ता,
अब दुश्वार मिलना मिलाना हो गया है।
कल तक न था जिसको कुछ शऊर,
रूप उसका कातिलाना हो गया है।
जयन्ती प्रसाद शर्मा

Sunday, 24 March 2019

मैं शराब हूँ

मैं शराब हूँ,
लोग कहते हैं मैं खराब हूँ।
खराबी मुझमें नहीं,
पीने वालों की सोच में है।
छक कर पीना,
खोना होश में है।
मैं अंगूरी आसव,
घूँट दो घूँट पीने वालों को देती मज़ा।
बे हिसाब पीने वालों को,
देती सजा।
मैं उसके मन बुद्धि  पर,
कर लेती अधिकार।
पटक कर उसे किसी नाले में,
करती प्रतिकार।
मैं अपने वशी भूत पर,
बुढ़ापा आने नहीं देती।
उससे पहले ही उसे,
मौत के आगोश में दे देती।
मेरा यह कबूलनामा,
स्वीकार लीजिये।
तौबा छक कर पीने से,
यार कीजिये।
जयन्ती प्रसाद शर्मा

Tuesday, 19 March 2019

होली खेलि रहे नन्दलाल

होली खेलि रहे नन्दलाल,
बिरज की खोरी में।
होरी खेलन बरसाने आये, 
ग्वाल बाल कान्हा लैकें आये।
भर लाये लाल गुलाल,
पीत पट झोरी में ।                     
चंद्र सखी राधा की आयी,
भरि कें गगरी जल लै आयी।
जानें घोरि लियौ रँग लाल-
कमोरी कोरी में।                        
ग्वालन घेरी वृषभानु किशोरी,
चंद्राबल की गगरी फोरी।
राधे मुख मलौ गुलाल-
श्याम नें होरी में।                       
करौ न श्याम मोसौं बरजोरी,
हा हा खाऊँ मैं करूँ चिरौरी।
मेरौ टूटो नौलख हार-
जोरा जोरी में।
जयन्ती प्रसाद शर्मा
चित्र गूगल से साभार

Sunday, 10 March 2019

मैं हूँ आज ग़म ज़दा

मैं हूँ आज ग़म ज़दा,
आक्रोशित होता हूँ यदा कदा।
दुश्मनों ने गहरी घात की है,
आँसुओंकी मुल्क को सौगात दी है।
बैरियों का नाश हो,
दुखी दिल से निकलती है सदा।
होता युद्ध तो करते कुछ बारे न्यारे,
छिपी घात से बिना दिखाये शौर्य-
मारे गये बेचारे।
उनकी शहादतों के गीत गाये जायेंगे सर्वदा।
शहीदों की कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जायेंगीं,
दुश्मनों की खुशियाँ उनके रक्त संग बह जायेंगीं।
वे सो न सकेंगे चैन से,
डरता रहेगा मन सदा।
हर कोई यहाँ आक्रोशित है,
बदला लेने को संकल्पित है।
इस जनाक्रोश का क्या होगा अंजाम,
अभी तो हुई भी नहीं है इब्तदा।

जयन्ती प्रसाद शर्मा

Sunday, 3 March 2019

अंग भभूत मली

श्री शिव शंकर संसार सार,
करते थे अपना श्रृंगार।
सँभाल कर जटाओं में गंग,
धारण कर नाग-चन्द्र।
मलने लगे भभूत,
महादेव अवधूत। 
कुछ भभूत उड़ी,
नाग की आँख में पड़ी।
नाग फुंफकार उठा,
फुसकार से चंद्र से टपकी सुधा। 
अमृत की वह बूंद ब्याध्र चर्म परचढ़ी,
जी उठा ब्याध्र जान उसमें पड़ी।
जी कर उसने लगा दी दहाड़,
सिंहनाद से गूंजा पहाड़।
मची हलचल जैसे लग गई आग, 
डरकर नन्दी गया भाग।
महादेव भोलेशंकर, 
हुए दिगम्बर।
स्वयं को इधर उधर छिपाने लगे,
जगदम्बा को देख कर लजाने लगे।
भोलेनाथ की देख कर दशा,
शैल सुता भी गईं लजा।
देख कर दिगम्बर नाथ को शरमाने लगीं,
मुँह फेर कर जगदम्बे मुस्काने लगीं।
जयन्ती प्रसाद शर्मा
चित्र गूगल से साभार




Thursday, 28 February 2019

फहरादो झंडा हिंदुस्तान का

नाम मिटा दो दुनियाँ के नक्शे से,
पाकिस्तान का।
उतार फैंको चाँद सितारा,
फहरादो झंडा हिंदुस्तान का।
कोई मुल्क था पाकिस्तान,
रहे न इसका कोई निशान।
आतताइयों को करो ख़त्म,
दूर करो दर्द सारे जहान का।
शहीदों की मौत का लो प्रतिकार,
कर लो पाक पर अधिकार।
बनाओ उसको एक प्रान्त, 
भारत महान का।
नहीं भावना उसकी शुद्ध ,
वह बस कर सकता है छद्म युद्ध।
सम्मुख युद्ध में वह हारेगा,
कर न सकेगा आकलन अपने नुकसान का।
शहीदों का लहू रंग लायेगा,
वह अपनी करनी पर पछतायेगा।
दुख नेस्तनाबूद करेगा उसको,
अपनों को खोये इंसान का। 
जयन्ती प्रसाद शर्मा